The Recycled Poetry : यतीन्द्र मिश्र – जुलाहों का घर

जुलाहों का घर
कहीं ढूँढा जाता है ??

किधर भी चले जाओ
अगर उस रास्ते पर
काशी
मगहर
अयोध्या
जैसा कोई नगर दिख पड़े
तो घर वहीँ मिल जाता है

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जुलाहों का घर
कब ढूँढा जाता है ?

अगर चलते जाओ
सब दिशाओं की तरफ
और उस रास्ते पर कभी
काशी
मगहर
अयोध्या
जैसा कोई नगर न आये

तब वहीँ से
घर फिर खोजा जाता है

जुलाहों का घर
क्यों ढूँढा जाता है ?

कहीं जाना न हो
न ही कहीं से आना हो
ऐसे में अगर
काशी
मगहर
अयोध्या
जैसे नगरों की सुध आए

तभी घर ढूँढा जाता है ।

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